जलमंडल 

  • हमलोगों को यह पूर्व से ज्ञात है कि सम्पूर्ण पृथ्वी का लगभग 70.80% भाग पर जल है।
  • पृथ्वी पर कुल 29.20% भाग स्थल है।
  • पृथ्वी पर जल का विभिन्न स्रोत जैसे नदी, तालाब, झील, झरना, सागर, महासागर पाये जाते है।
  • जल के इन सभी स्रोतों में उपस्थित जल की 97% की मात्रा केवल महासागरों में पाये जाते है।
  • महासागरीय जल का तापमान लगभग 5° सेन्टीग्रेड से 33° सेन्टीग्रेड के बीच पाया जाता है।
  • पृथ्वी पर उत्तरी गोलार्द्व में जल का भाग 39% एवं स्थल का भाग 61% है।
  • पृथ्वी पर दक्षिणी गोलार्द्व में जल का भाग 81% एवं स्थल का भाग 19% है।
  • महासागरीय जल के दो महत्वपूर्ण गुण लवणता एवं तापमान है।
  • समुद्र उसे कहते है जो तीन तरफ से जल से घिरा हुआ हो और दूसरी तरफ महासागर से मिला हो।
  • पृथ्वी के स्थलीय भाग जब समुद्र का जल क्षेत्र बन जाता है तब वह भाग खाडी ( Gulf ) कहलाता है।
  • जब समुद्र का जल दो तरफ से स्थलों से घिरा होता है और एक तरफ टापू और दूसरे तरफ का मुहाना समुद्र से मिला होता है तो वह भी खाडी ( Bay ) कहलाता है।
  • महासागरों के में स्थित जल का औसत तापमान 1° सेन्टीग्रेड होता है।
  • महासागरों के जल का न्यूनतम तापमान सुबह पाँच बजे के समय होता है जबकि अधिकतम तापमान दिन के दोपहर के दो बजे होता है।
  • वार्षिक आधार पर महासागरीय जल के न्यूनतम तापमान फरवरी में होता है जबकि उच्च तापमान अगस्त में होता है।
  • प्रशांत महासागर के अपेक्षा अटलांटिक महासागर में वार्षिक तापांतर अधिक रहता है। इसका मुख्य कारण दोनों के आकार में अंतर के कारण होता है।
  • उत्तरी गोलार्द्व में स्थल अधिक होने के कारण यहाँ के तापमान में अधिक अंतर होता है जबकि दक्षिणी गोलार्द्व में कम तापांतर होता है।
  • महासागरीय जल में लवणता होती है जिसको प्रति हजार ग्राम में मापा जाता है।
  • महासागरीय जल की औसत लवणता प्रति 1000 ग्राम जल में 35 ग्राम होती है।
  • समान खारेपन वाले सागर के बीच की रेखा को समलवण रेखा ( Isohaline) कहा जाता है।
  • सबसे अधिक लवणता 20° उत्तरी अक्षांश से 40° उत्तरी अक्षांश एंव 10° दक्षिणी अक्षांश से 30° दक्षिणी अक्षांश के बीच पायी जाती है।
  • सागरीय लवणता जब अधिक होती है तो जल का हिमांक कम एवं जल का क्वथनांक अधिक होता है।
  • तुर्की में स्थित वान झील की लवणता सबसे अधिक है जो 330% है।
  • महासागर में सबसे गहरा प्रशांत महासागर के मैरियाना गर्त है जो गुआँम द्वीप के पास स्थित है। इस गर्त की गहराई 11 किलोमीटर है।
  • महासागरों में जहाँ सबसे अधिक गहरा भाग होता है उस भाग को गर्त कहा जाता है।
  • विश्व का सबसे गहरा गर्त प्रशांत महासागर का मेरियाना गर्त है जो 11033 मीटर गहरा है।
  • प्रशांत महासागर का टोंगा एल्ड्रिच गर्त 10882 मीटर गहरा गर्त है।
  • प्रशांत महासागर का जापान स्थित रामापो गर्त 10554 मीटर गहरा गर्त है।
  • प्रशांत महासागर का क्यूराइल गर्त 10498 मीटर गहरा गर्त है।
  • प्रशांत महासागर का फिलीपींस स्थित स्वायर गर्त 10475 मीटर गहरा गर्त है।
  • अटलांटिक महासागर का प्यूरटोरिको गर्त 9219 मीटर गहरा गर्त है।
  • हिंद महासागर का डोएमेंटिना गर्त 8047 मीटर गहरा गर्त है।
  • हिंद महासागर का सुण्डा गर्त 7450 मीटर गहरा गर्त है।
  • सागरीय तटों एवं सागरीय मैदानों के बीच अधिक ढाल वाले भाग को महाद्वीपीय मग्नढाल कहते है।
  • अटलांटिक महासागर में सबसे अधिक महाद्वीपीय मग्नढाल पाया जाता है।
  • महाद्वीप का वह हिस्सा जो महासागरों के जल से डूबा रहता है महाद्वीपीय मग्नतट कहलाता है।
  • महासागरों का वह स्थल जहाँ जल की गहराई छिछली होती है उस स्थल को शोल कहा जाता है।
  • विश्व की सबसे बडी प्रवाल भित्ति आस्ट्रेलिया के क्वीसलैंड के समीप स्थित है। इस प्रवाल भित्ती का नाम ग्रेट बेरियर रीफ है।
  • प्रशांत महासागर पृथ्वी के एक तिहाई क्षेत्रफल पर फैला हुआ है।
  • प्रशांत महासागर की आकृति त्रिभुजाकार है।

प्रशांत महासागर की पूर्वी सीमा का महाद्वीप उत्तरी अमेरिका एवं दक्षिणी अमेरिका है जबकि पश्चिमी सीमा पर एशिया एवं आस्ट्रेलिया महाद्वीप स्थित है। इसके उत्तर में जलडमरूमध्य एवं दक्षिण में अंटार्कटिका स्थित है।

  • अंटलांटिक महासागर पृथ्वी के छठा भाग पर स्थित है।
  • अंटलांटिक महासागर का क्षेत्रफल प्रशांत महासागर के क्षेत्रफल का आधा है।
  • अंटलांटिक महासागर की आकृति अंग्रेजी के S अक्षर के तरह की है।
  • अंटलांटिक महासागर के उत्तर की ओर उत्तरी सागर, बाल्टिक सागर, हडसन की खाडी एवं ग्रीनलैण्ड स्थित है। इसके दक्षिण में अंटार्कटिका तक का भाग खुला हुआ है। इसके पूरब में यूरोप एवं अफ्रीका स्थित है जबकि पश्चिम में उत्तरी अमेरिका एवं दक्षिणी अमेरिका स्थित है। 
  • अंटलांटिक महासागर के तटों पर कई सीमान्त सागर जैसे- बाल्टिक सागर, हडसन की खाडी, उत्तरी सागर,डेनमार्क जलडमरूमध्य, डेवीस जलडमरूमध्य इत्यादि पाये जाते है।
  • अंटलांटिक महासागर के तटों पर कई द्वीप भी पाये जाते है जैसे- बरमूडा प्रवाल द्वीप, अर्सेसन, फाकलैण्ड, पाइको द्वीप, गुआ ज्वालामुखी द्वीप, ट्रिस्ता दी कान्हा, सेंट हेलना, ट्रिनिडाड, जार्जिया, ब्रिटिश द्वीप इत्यादि प्रमुख है।
  • हिन्द महासागर के उत्तर में एशिया स्थित है। इसके दक्षिण में अंटार्कटिका महाद्वीप स्थित है। इसके पश्चिम में अफ्रीका एवं पूरब में एशिया महाद्वीप स्थित है।
  • हिन्द महासागर के एक तरफ प्रशांत महासागर तो दूसरी तरफ अंटलांटिक महासागर स्थित है।
  • हिन्द महासागर के अंतर्गत प्रमुख भारतीय द्वीप लक्षद्वीप एवं मालदीव प्रवाल द्वीप स्थित है।

महासागरीय जलधाराएँ

  • सागरों एवं महासागरों में जल जब एक निश्चित दिशा में प्रवाहित होने लगती है तो उसी प्रवाह को महासागरीय जलधारा कहते है।
  • महासागरीय जलधारा की दो प्रकार होती है – गर्म जलधारा एवं ठण्डी जलधारा।
  • जब महासागरों की जलधारा जब विषुवत रेखा से पृथ्वी के ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती है तो वह जलधारा गर्म जलधारा होती है।
  • जब महासागरों की जलधारा जब पृथ्वी के ध्रुवों से विषुवत रेखा की ओर प्रवाहित होती है तो वह जलधारा ठण्डी जलधारा होती है।
  • महासागर का जल जब हवा के वेग से बहता है तो उसे प्रवाह कहा जाता है।
  • जब महासागरों का जल अधिक प्रवाह से एक निश्चित दिशा में बहता है तो वह धारा कहलाता है।
  • पृथ्वी के घूर्णन करने के कारण जो आभासी बल उत्पन्न होता है उस बल को काँरिओलिस बल कहा जाता है।
  • काँरिओलिस बल के प्रभाव के कारण उत्तरी गोलार्द्व की जलधारा अपनी दायीं ओर प्रवाहित होती है तथा दक्षिणी गोलार्द्व की जलधारा अपनी बायीं ओर प्रवाहित होती है।
  • महासागरीय जलधारा की प्रवाह का एक मात्र अपवाद हिन्द महासागर के उत्तरी भाग में पाया जाता है।
  • हिन्द महासागर के उत्तरी भाग में प्रवाहित जलधारा की दिशा मानसूनी हवा की दिशा के साथ बदल जाया करती है। जैसे- ठण्डी जलधारा गर्म सागर की तरफ एवं गर्म जलधारा ठण्डी सागर की तरफ प्रवाहित होने लगती है।
  • प्रशांत महासागर की प्रवाहित गर्म जलधाराएँ जो निम्न है- उत्तर विषुवत रेखीय धारा, उत्तरी प्रशांत प्रवाह, सुशीमा जलधारा, क्यूरोसियो जलधारा, अलास्का जलधारा, पूर्वी आस्ट्रेलिया जलधारा, दक्षिण विषुवत रेखीय जलधारा, विपरीत विषुवत रेखीय जलधारा।
  • प्रशांत महासागर की प्रवाहित ठण्डी जलधाराएँ जो निम्न है- कैलीफोर्निया जलधारा, अंटार्कटिका जलधारा, क्यूराइल विषुवत रेखीय जलधारा, हम्बोल्ट या पेरूवियन जलधारा।
  • अटलांटिक महासागर की प्रवाहित गर्म जलधाराएँ जो निम्न है- कनारी जलधारा, फ्लोरिडा जलधारा, उत्तरी विषुवत रेखीय जलधारा, गल्फ स्ट्रीम जलधारा, दक्षिणी विषुवत रेखीय जलधारा, ब्राजील जलधारा, विपरीत विषुवत रेखीय जलधारा ( गिनी जलधारा)।
  • अटलांटिक महासागर की प्रवाहित ठण्डी जलधाराएँ जो निम्न है- बेंजुएला जलधारा, लेब्राडोर जलधारा, इरमिंजर जलधारा, पूर्वी ग्रीनलैण्ड जलधारा, अंटार्कटिका जलधारा, फाकलैण्ड जलधारा।
  • हिन्द महासागर की प्रवाहित गर्म एंव स्थायी जलधाराएँ जो निम्न है- मोजाम्बिक जलधारा, दक्षिण विषुवत रेखीय जलधारा, अगुलहास जलधारा।
  • हिन्द महासागर की प्रवाहित गर्म एवं मानसून से परिवर्तनीय जलधारा जो निम्न है – ग्रीष्मकालीन मानसूनी जलधारा।
  • हिन्द महासागर की प्रवाहित ठण्डी एंव स्थायी जलधारा जो निम्न है – पश्चिम आस्ट्रेलिया जलधारा।
  • हिन्द महासागर की प्रवाहित ठण्डी एवं मानसून से परिवर्तनीय जलधारा जो निम्न है – शीतकालीन मानसूनी जलधारा।
  • उत्तरी अटलांटिक महासागर में 20° से 40° उत्तरी अक्षांशों के बीच एवं 35° से 75° पश्चिमी देशांतरों के मध्य चारो ओर प्रवाहित होने वाली जलधाराओं जैसे गल्फ स्ट्रीम जलधारा, कनारी जलधारा तथा उत्तरी विषुवतीय रेखीय जलधारा के मध्य स्थित शान्त एवं स्थिर जल का क्षेत्र पाया जाता है इस क्षेत्र को सारगैसो सागर कहा जाता है।
  • सारगैसो सागर में जडविहीन घासें पायी जाती है जिसे सारगैसम कहा जाता है।
  • सर्वप्रथम स्पेन के नाविक समूहों ने सारगैसो सागर को देखे थे।
  • गल्फ स्ट्रीम एवं लेब्राडोर जलधारा न्यूफाउण्डलैंड के समीप मिलती है। न्यूफाउण्डलैण्ड पर ही समुद्री मछली पकडने का मसहूर स्थल ग्रैंड बैंक स्थित है।
  • गर्म जलधारा एवं ठण्डी जलधारा जिस स्थान पर मिलती है उस स्थान पर प्लेंकटन नामक घास पाया जाता है, जिससे उस स्थान पर मत्सय उध्योग सर्वाधिक बिकसित हुआ है।
  • महासागरीय जल की उपरी सतह का दैनिक औसत तापान्तर नगण्य होता है यह लगभग 1° सेन्टीग्रेड तक ही होता है।
  • महासागरीय जल का वार्षिक उच्चतम तापक्रम अगस्त में रहता है।
  • महासागरीय जल का वार्षिक निम्नतम तापक्रम फरवरी में रहता है।

ज्वार भाटा 

  • सूर्य एवं चंद्रमा की आकर्षण शक्तियों के कारण महासागरों का जल ऊपर उठता है एवं नीचे गिरता है इसी क्रम को ज्वार भाटा कहा जाता है।
  • सागरीय जल जब ऊपर की ओर उठ कर आगे तट की ओर बढता है तो उसे ज्वार कहा जाता है जब वहीं जल नीचे गीरकर वापस लौटने लगता है तो भाटा कहलाता है।
  • चंद्रमा सूर्य के अपेक्षा पृथ्वी के अधिक निकट है जिसके कारण चंद्रमा का ज्वार उत्पादक बल सूर्य की बल की अपेक्षा दुगुना होता है।
  • पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन जब पृथ्वी, सूर्य एवं चंद्रमा एक सीध में होते है तो उस दिन जल अधिक ऊपर तक उठता है जिसे उच्च ज्वार कहा जाता है।
  • दोनों पक्ष के सप्तमी या कभी अष्टमी को सूर्य, चन्द्रमा एवं पृथ्वी एक सीध में न होकर एक बिन्दु पर समकोण बनाते है जिससे चन्द्रमा एवं सूर्य दोनों का आकर्षण बल कमजोर हो जाता है जिससे सागरों का जल बहुत ऊंचा नहीं उठता है एवं वह निम्न ज्वार कहलाता है।
  • जब पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी अधिक हो जाती है तो उस समय ऊठती ज्वार को अपभू ज्वार कहा जाता है।
  • जब पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी निकट होती है तो उस समय ऊठती ज्वार को उपभू ज्वार कहा जाता है।
  • प्रतिदिन प्रत्येक स्थान पर 12 घंटे 26 मिनट पर ज्वार आता है एवं ज्वार के ठीक 6 घंटे 13 मिनिट पर भाटा आता है।
  • पृथ्वी पर प्रतिदिन दो बार ज्वार एवं दो बार भाटा आता है। एक बार ज्वार चन्द्रमा के आकर्षण बल के कारण तो दूसरी बार ज्वार पृथ्वी के अपकेन्द्रीय बल के कारण आता है।
  • पृथ्वी पर मात्र एक स्थान इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर स्थित साउथैम्पटन है जहाँ ज्वार भाटा प्रतिदिन चार बार आता है। यहाँ पर दो बार ज्वार उत्तरी सागर से होकर एवं दो बार ज्वार इंग्लिश चैनल से होकर विभिन्न अंतरालों पर आता है। 
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